दिल्ली विश्वविद्यालय के दो कॉलेजों पर बम थ्रेट, सुरक्षा चौकसी बढ़ी

रमजस और देशबन्धु कॉलेज को मिली धमकी

नई दिल्ली: बुधवार सुबह दिल्ली विश्वविद्यालय के दो प्रतिष्ठित कॉलेज—रमजस कॉलेज (नॉर्थ कैंपस) और देशबन्धु कॉलेज (कलकाजी)—को बम की धमकी भरे ईमेल मिलने के बाद सुरक्षा के कड़े उपाय किए गए और दोनों स्थानों पर तैनाती में जुटी पुलिस तथा बम डिस्पोजल टीमों ने विस्तृत सर्च ऑपरेशन चलाया। अधिकारियों के मुताबिक यह खतरा रात में या सुबह-सुबह प्राप्त हुआ, जिस पर तुरंत प्राथमिक कार्रवाई शुरू कर दी गई।

दोनों कॉलेजों में कैंपस सुरक्षा तंत्र और दिल्ली पुलिस ने क्षेत्र को सील कर दिया तथा बम निरोधक दस्ते (BDT) ने भवनों, कक्षों और आसपास के खुले हिस्सों की तलाशी ली। कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया और पढ़ाई-लिखाई/सामाजिक गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगाई गई। प्रशासन ने कहा है कि किसी भी संभावित खतरे की नज़रअंदाज़ी नहीं की जाएगी।

अब तक किए गए निरीक्षणों में किसी प्रकार का संदिग्ध विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु हाथ नहीं लगी है, और पुलिस इसकी सत्यता की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां ईमेल के स्रोत और डिजिटल ट्रैक्स को ट्रेस करने में लगी हैं ताकि धमकी भेजने वालों की पहचान की जा सके। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अधिकारियों ने इस तरह की धमकियों को होक्स (मजाक/भ्रामक) भी करार दिया है, पर जांच जारी है।

दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों, स्टाफ और अभिभावकों से शांत रहने तथा आधिकारिक सूचनाओं का इंतजार करने का अनुरोध किया है। पुलिस ने भी कहा है कि जो भी नया सूचना मिलेगी उसे सार्वजनिक किया जाएगा और फिलहाल परिस्थिति को नियंत्रित रखने के लिए सुरक्षा कड़ी रखी गई है।

विदेश में भी आतंकीय छाप — कैलिफोर्निया फायरिंग की जिम्मेदारी गोदारा गिरोह ने मानी

गैंग ने सोशल-पोस्ट में हमला स्वीकारा;

आरोपियों ने ISI-फंडिंग का इल्जाम भी लगाया

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय गैंगस्टरों से जुड़ी हिंसा एक बार फिर सुर्खियों में है। रोहित गोदारा नामक गिरोह ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया है कि अमेरिका के कैलिफोर्निया में पूर्व दिन हुई फायरिंग वही करवाना चाहते थे और उन्होंने इस घटना की जिम्मेदारी सुनाई है। पोस्ट में कहा गया है कि फायरिंग का निशाना राकेश राजदेव (जिसे रिपोर्टों में पीड़ित बताया गया है) था। गोल-बारूद चलाने और विदेशी ठिकानों पर हमले करवाने के ऐसे दावे से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

गैंग ने अपने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि पीड़ित या उसके नेटवर्क ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी—ISI—को फंडिंग की है, और ऐसे ‘देशविरोधी’ कृत्यों को वह बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि गिरोह विदेशों में भी निशाना साधने में सक्षम होने का दावा कर रहा है, जिसने दोनों देशों की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र के समन्वय की आवश्यकता को रेखांकित किया है। तथापि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।

भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां इस पोस्ट और घटना की जांच कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल-मीडिया पर ऐसे बयानों के फैलने से न केवल कानूनी जांच जटिल होती है, बल्कि संभावित प्रतिशोध और अन्तरराष्ट्रीय कूटनीतिक तनाव भी उत्पन्न हो सकते हैं। पुलिस और खुफिया निकाय फिलहाल पुष्टि-योग्य साक्ष्य, मोबाइल/सोशल-एक्टिविटी और विदेशी सहयोग के जरिये सख्त कार्रवाई करने की तैयारी कर रहे हैं।

अंत में, यह ध्यान देने योग्य है कि सोशल मीडिया दावों को तत्काल सत्य मान लेना जोखिम भरा होगा — इसलिए स्वतंत्र जांच और दोनों देशों के अधिकारियों के बीच समन्वय ही अंतिम तस्वीर बताएगा। नागरिकों व समुदायों से अपील है कि अफवाहों को फैलाकर तनाव न बढ़ाएँ और किसी भी संदिग्ध जानकारी की सूचना स्थानीय कानून-निग्रह इकाइयों को दें।

दिल्ली प्रदूषण के खिलाफ सख्त कार्रवाई — रोड कटिंग और खुले मलबे पर FIR का फरमान

दिल्ली-NCR में बढ़ती वायु-प्रदूषण की फिक्र के बीच सरकार ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उच्च-स्तरीय बैठक के बाद जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक अनधिकृत रूप से रोड कटिंग करने, निर्माण-मलबा खुले में फेंकने या धूल फैलाने वाले अन्य कार्यों पर अब FIR दर्ज की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों/एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला राजधानी व आसपास के क्षेत्रों में 100% डस्ट मिटिगेशन लागू कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

प्रदूषण नियंत्रण के रोज़मर्रा के कारणों में सड़कों पर उड़ने वाली धूल और टूटे-फूटे रोड से उठने वाला कण बड़ा योगदान करते हैं। इसलिए सरकार ने सभी विभागों—MCD, PWD, DDA, DMRC समेत—को कठोर निर्देश दिए हैं और कहा है कि गड्ढों (potholes) की मरम्मत 72 घंटे के भीतर सुनिश्चित की जाए। इससे धूल फैलने और ट्रैफिक-स्लो-डाउन के कारण ईंधन-खपत बढ़ने से होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

डस्ट-नियंत्रण के लिए DPCC ने रोड-कटिंग पर SOP जारी की है — बड़े रास्तों पर दो मीटर ऊंची डस्ट-बैरीयर लगाने, ढीले मिट्टी व C&D वेस्ट को ढंककर रखना और नियमित पानी छिड़काव जैसी शर्तें अनिवार्य कर दी गई हैं। उल्लंघन पर भारी जुर्माना और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।

सरकार का कहना है कि अब केवल बयानबाजी नहीं बल्कि जमीन पर असर दिखेगा—निगरानी, CCTV/सेंसर मॉनिटरिंग और विभागीय जवाबदेही से ‘ऑपरेशन-मोड’ में काम चलाया जाएगा। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे निर्माण-स्थलों या खुले मलबा फेंकने जैसी गतिविधियों की सूचना दें ताकि समय पर कानूनी एक्शन लिया जा सके।

ढाबे में शराब परोसने का गैरकानूनी ठिकाना पकड़ा गया

आबकारी टीम की छापेमारी में खुलासा, काउंटर पर बैठे युवक के खिलाफ मुकदमा

हरियाणा के बहादुरगढ़ शहर में आबकारी नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। आबकारी विभाग की टीम ने पंजाबी चिकन कॉर्नर नामक ढाबे पर छापेमारी कर अवैध अहाता पकड़ा है, जहां बिना किसी लाइसेंस के ग्राहकों को शराब परोसी जा रही थी। कार्रवाई के दौरान ढाबे के काउंटर पर बैठे एक व्यक्ति को मौके से दबोच लिया गया, जिसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है।

आबकारी विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि उक्त ढाबे में खुलेआम शराब पिलाई जा रही है और वहां देर रात तक गैरकानूनी गतिविधियां चलती हैं। सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापा मारा। टीम के पहुंचते ही वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोग मौके से खिसकने का प्रयास करने लगे, लेकिन काउंटर संभाल रहे व्यक्ति को पकड़ लिया गया।

जांच के दौरान ढाबे के भीतर से शराब की बोतलें, गिलास और अन्य सामग्री बरामद की गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वहां अवैध रूप से अहाता संचालित किया जा रहा था। मौके पर मौजूद व्यक्ति से जब लाइसेंस संबंधी दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई वैध अनुमति पत्र पेश नहीं कर सका। इसके बाद आबकारी विभाग ने तुरंत उसके खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की।

आबकारी अधिकारियों का कहना है कि अवैध अहातों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और किसी भी कीमत पर गैरकानूनी शराब कारोबार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस तरह के अवैध ठिकाने न केवल कानून-व्यवस्था के लिए खतरा हैं, बल्कि सामाजिक माहौल को भी प्रभावित करते हैं।

कार्रवाई की खबर फैलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे अवैध अहातों के कारण इलाके में नशाखोरी और झगड़ों की घटनाएं बढ़ रही थीं। विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में अन्य संदिग्ध स्थानों पर भी छापेमारी की जाएगी।

रूसी राष्ट्रपति की राजधानी में एंट्री, पहले दिन सर्वोच्च नेतृत्व से विशेष संवाद

भारत दौरे की औपचारिक शुरुआत,

शाम को प्रधानमंत्री संग निजी बैठक और रात्रिभोज कार्यक्रम

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने दो दिवसीय भारत दौरे पर राजधानी दिल्ली पहुंचे। उनके आगमन के साथ ही भारत-रूस संबंधों को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई। राजधानी के पालम एयरपोर्ट पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया, जहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। उच्चस्तरीय सुरक्षा कवच के बीच उनका काफिला सीधे निर्धारित निवास स्थल की ओर रवाना हुआ।

दिल्ली पहुंचने के बाद पहले दिन का कार्यक्रम बेहद सीमित लेकिन महत्वपूर्ण रखा गया। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच एक निजी बैठक प्रस्तावित रही, जिसे दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच यह बातचीत औपचारिक बैठकों से पहले रणनीतिक मुद्दों पर आपसी तालमेल बनाने के उद्देश्य से रखी गई।

सूत्रों के अनुसार, इस निजी मुलाकात के दौरान वैश्विक हालात, ऊर्जा सहयोग, रक्षा सौदे, व्यापारिक साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर अनौपचारिक चर्चा हुई। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी की ओर से राष्ट्रपति पुतिन के सम्मान में विशेष रात्रिभोज का आयोजन किया गया, जिसमें बेहद सीमित संख्या में वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

पहले दिन के कार्यक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी बातचीत से अगले दिन होने वाली औपचारिक वार्ताओं की दिशा तय होती है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह दौरा खास महत्व रखता है।

राष्ट्रपति पुतिन के दौरे को लेकर दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। शहर के कई इलाकों में ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव और विशेष चेकिंग की गई है। सरकार के स्तर पर इस दौरे को भारत-रूस संबंधों को नई गति देने वाला कदम बताया जा रहा है।

अब सबकी निगाहें अगले दिन होने वाली आधिकारिक बैठकों और संभावित समझौतों पर टिकी हैं, जिनसे दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

खनन माफिया का दुस्साहस, पुलिस को घेरकर टिप्पर छुड़ाया

स्कॉर्पियो में आए बदमाश, सरकारी कार्रवाई में बाधा

हरियाणा के पंचकूला जिले में खनन माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद नजर आए कि उन्होंने पुलिस टीम को घेरकर जब्त किया गया टिप्पर ही छुड़ा लिया। यह सनसनीखेज घटना उस समय हुई, जब पुलिस अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक टिप्पर को कब्जे में लेकर थाने ले जा रही थी। इसी दौरान स्कॉर्पियो गाड़ियों में सवार होकर आए माफियाओं ने रास्ता रोक लिया और पुलिस पर दबाव बनाकर टिप्पर छुड़ा ले गए।

जानकारी के मुताबिक, खनिज विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने अवैध खनन में लिप्त एक टिप्पर को पकड़ा था। जैसे ही टीम वाहन को लेकर आगे बढ़ी, तभी पीछे से स्कॉर्पियो में सवार 8-10 लोग मौके पर पहुंच गए। आरोपियों ने पुलिस को चारों ओर से घेर लिया और धमकाते हुए टिप्पर छुड़ाकर ले गए। कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

घटना की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत नाकाबंदी कर आरोपियों का पीछा शुरू किया। करीब कुछ किलोमीटर तक चले पीछा अभियान के बाद पुलिस ने दो आरोपियों को दबोच लिया, जबकि अन्य आरोपी अंधेरे और इलाके की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर फरार हो गए।

पुलिस ने पकड़े गए दोनों आरोपियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा, पुलिस से छीना-झपटी और अवैध खनन समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। साथ ही फरार आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित कर दी गई हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी हाल में माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना से यह भी साफ हो गया है कि खनन माफिया किस कदर संगठित और बेखौफ हो चुका है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही सभी फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

फर्जी अफसर बनकर छात्र से ठगी, एक लाख से ज्यादा ऐंठे

लड़की से जुड़े मुकदमे का डर दिखाया,

थर्ड डिग्री टॉर्चर की वीडियो दिखाकर वसूले 1.17 लाख

हरियाणा के बहादुरगढ़ में पुलिस अधिकारी बनकर छात्र से 1.17 लाख रुपये की ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोपी ने खुद को डीएसपी बताकर एक छात्र को केस में फंसाने की धमकी दी और थर्ड डिग्री टॉर्चर की वीडियो दिखाकर डराया। घबराए छात्र ने डर के कारण अलग-अलग किश्तों में ठग को 1 लाख 17 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।

पीड़ित छात्र के अनुसार, उसे एक अनजान नंबर से कॉल आई थी। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बहादुरगढ़ का डीएसपी बताते हुए कहा कि उसके खिलाफ एक लड़की ने गंभीर आरोप लगाए हैं और जल्द ही उसकी गिरफ्तारी होने वाली है। आरोपी ने छात्र को यह भी कहा कि यदि उसने तुरंत पैसे नहीं दिए तो उसे थाने बुलाकर थर्ड डिग्री टॉर्चर दिया जाएगा।

छात्र का भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने मोबाइल पर कथित थर्ड डिग्री टॉर्चर की एक वीडियो भी भेजी, जिससे वह और ज्यादा डर गया। आरोपी ने कहा कि मामले को “सेट” कराने के लिए उसे पैसों की जरूरत है। डर और घबराहट में छात्र ने आरोपी के बताए गए खाते में अलग-अलग तारीखों में कुल 1.17 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

कुछ समय बाद जब आरोपी का मोबाइल नंबर बंद हो गया और कोई कार्रवाई भी नहीं हुई, तब छात्र को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर पुलिस को सारी जानकारी दी और शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने पीड़ित के बयान के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ ठगी, धमकी और फर्जी पहचान से धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। बैंक खातों की जांच शुरू कर दी गई है, जिनमें पैसे ट्रांसफर हुए थे।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह साइबर ठगी का मामला प्रतीत होता है और आरोपी की पहचान के लिए तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया जा रहा है। जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता पर संकट के बादल, माइनॉरिटी दर्जा पड़ सकता है निरस्त

NCMEI में पेश होंगे रजिस्ट्रार व शिक्षा सचिव

हरियाणा स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का माइनॉरिटी दर्जा अब गंभीर संकट में आ गया है। विश्वविद्यालय पर आतंकी मॉड्यूल से जुड़े होने जैसे बेहद संवेदनशील आरोप सामने आने के बाद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने मामले को संज्ञान में लिया है। अब इस पूरे प्रकरण पर एनसीएमईआई में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और शिक्षा विभाग के सचिव अपना पक्ष रखेंगे।

सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में सामने आए खुलासों में यह दावा किया गया कि विश्वविद्यालय परिसर का इस्तेमाल आपत्तिजनक और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए किया गया। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और खुफिया इनपुट के आधार पर यह भी कहा गया कि यहां से कथित तौर पर एक आतंकी मॉड्यूल संचालित किया जा रहा था। इन गंभीर आरोपों के बाद विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और माइनॉरिटी दर्जे पर सवाल खड़े हो गए हैं।

यूनिवर्सिटी को दिया गया माइनॉरिटी स्टेटस उसके लिए कई शैक्षणिक और प्रशासनिक सुविधाओं का आधार है। यदि यह दर्जा समाप्त होता है, तो दाखिले से लेकर अनुदान तक पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी को लेकर अब एनसीएमईआई ने रजिस्ट्रार और राज्य के शिक्षा सचिव को तलब कर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है।

शिक्षा विभाग की ओर से भी इस प्रकरण को गंभीरता से लिया जा रहा है। विभाग यह जांच कर रहा है कि विश्वविद्यालय को माइनॉरिटी दर्जा किन आधारों पर दिया गया था और क्या उसके नियमों का उल्लंघन हुआ है। वहीं विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि उस पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और वे सभी तथ्यों के साथ अपना पक्ष आयोग के समक्ष रखेंगे।

इस घटनाक्रम के बाद छात्रों और अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। हजारों विद्यार्थियों का भविष्य इस फैसले से जुड़ा हुआ है। अब सभी की नजरें एनसीएमईआई की आगामी सुनवाई और उसके निर्णय पर टिकी हैं, जिसने इस मामले को बेहद अहम बना दिया है।

जेलों में बच्चों की रहने की अवधि बढ़ी, अब 8 साल तक रह सकेंगे साथ

महिला कैदियों के बच्चों के लिए नियमों में बदलाव, विभाग ने 2 साल तक बढ़ाई सीमा

हरियाणा की जेलों में बंद महिला कैदियों के बच्चों को लेकर सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब जेलों में बच्चे अपनी मां के साथ 8 वर्ष की आयु तक रह सकेंगे। पहले यह सीमा 6 वर्ष निर्धारित थी, जिसे अब विभाग द्वारा दो साल और बढ़ा दिया गया है। इस फैसले से उन बच्चों को राहत मिलेगी जो अब तक कम उम्र में ही मां से अलग कर दिए जाते थे।

जेल विभाग के अनुसार, राज्य की विभिन्न जेलों में इस समय कुल 816 महिला कैदी बंद हैं, जिनमें से 47 बच्चे अपनी माताओं के साथ जेल परिसर में रह रहे हैं। इन बच्चों की देखभाल, पोषण और शिक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी भी जेल प्रशासन निभा रहा है। बच्चों के लिए अलग बैरक, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य जांच और शुरुआती शिक्षा की व्यवस्था पहले से ही की जा रही है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। छह साल की आयु में बच्चे अपनी मां से अलग हो जाते थे, जिससे उन्हें मानसिक आघात झेलना पड़ता था। अब दो साल अतिरिक्त समय मिलने से बच्चों को मां का संरक्षण और भावनात्मक सहयोग अधिक समय तक मिल सकेगा।

जेलों में रहने वाले इन बच्चों के लिए समय-समय पर मेडिकल चेकअप, टीकाकरण और पोषण संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। कुछ जेलों में बच्चों के लिए आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं, ताकि उन्हें प्रारंभिक शिक्षा मिल सके।

हालांकि, 8 साल पूरे होने के बाद बच्चों को परिवार के किसी सदस्य या सरकारी संरक्षण में भेजा जाएगा। इस दौरान सामाजिक कल्याण विभाग और बाल संरक्षण इकाइयों की भी भूमिका तय की गई है, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

इस फैसले के बाद महिला कैदियों और सामाजिक संगठनों ने सरकार के कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय बच्चों के हित में है और इससे उनका बचपन कुछ हद तक सामान्य रह सकेगा।

रोडवेज बस की टक्कर से बड़ा हादसा, मां-बेटा गंभीर रूप से घायल

बाइक से खेत जा रहे थे दोनों, तेज रफ्तार बस ने मारी टक्कर

हरियाणा के नारनौल शहर में सड़क हादसे का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां रोडवेज बस की टक्कर से बाइक सवार मां और बेटा घायल हो गए। हादसा उस समय हुआ जब दोनों बाइक पर सवार होकर अपने खेत की ओर जा रहे थे। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार, महिला अपने बेटे के साथ रोज की तरह खेत में काम के लिए घर से निकली थी। जैसे ही वे मुख्य सड़क पर पहुंचे, पीछे से तेज रफ्तार में आ रही रोडवेज की बस ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत घायलों को सड़क से उठाया और एंबुलेंस की मदद से उन्हें नारनौल के नागरिक अस्पताल भिजवाया।

डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद महिला की हालत को नाजुक देखते हुए उसे रोहतक PGI रेफर कर दिया, जबकि बेटे का इलाज नारनौल अस्पताल में जारी है। चिकित्सकों के अनुसार, महिला के सिर और शरीर में गंभीर चोटें आई हैं।

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने बस को कब्जे में ले लिया है, जबकि चालक से पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बस तेज रफ्तार में थी और चालक ने समय रहते ब्रेक नहीं लगाया, जिसके कारण यह दुर्घटना हुई।

पीड़ित परिवार की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई है। उसके आधार पर रोडवेज बस चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और दुर्घटना करने की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस हादसे के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तेज रफ्तार वाहनों पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।