अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता पर संकट के बादल, माइनॉरिटी दर्जा पड़ सकता है निरस्त

NCMEI में पेश होंगे रजिस्ट्रार व शिक्षा सचिव

हरियाणा स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का माइनॉरिटी दर्जा अब गंभीर संकट में आ गया है। विश्वविद्यालय पर आतंकी मॉड्यूल से जुड़े होने जैसे बेहद संवेदनशील आरोप सामने आने के बाद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने मामले को संज्ञान में लिया है। अब इस पूरे प्रकरण पर एनसीएमईआई में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और शिक्षा विभाग के सचिव अपना पक्ष रखेंगे।

सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में सामने आए खुलासों में यह दावा किया गया कि विश्वविद्यालय परिसर का इस्तेमाल आपत्तिजनक और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए किया गया। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और खुफिया इनपुट के आधार पर यह भी कहा गया कि यहां से कथित तौर पर एक आतंकी मॉड्यूल संचालित किया जा रहा था। इन गंभीर आरोपों के बाद विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और माइनॉरिटी दर्जे पर सवाल खड़े हो गए हैं।

यूनिवर्सिटी को दिया गया माइनॉरिटी स्टेटस उसके लिए कई शैक्षणिक और प्रशासनिक सुविधाओं का आधार है। यदि यह दर्जा समाप्त होता है, तो दाखिले से लेकर अनुदान तक पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी को लेकर अब एनसीएमईआई ने रजिस्ट्रार और राज्य के शिक्षा सचिव को तलब कर पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है।

शिक्षा विभाग की ओर से भी इस प्रकरण को गंभीरता से लिया जा रहा है। विभाग यह जांच कर रहा है कि विश्वविद्यालय को माइनॉरिटी दर्जा किन आधारों पर दिया गया था और क्या उसके नियमों का उल्लंघन हुआ है। वहीं विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि उस पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और वे सभी तथ्यों के साथ अपना पक्ष आयोग के समक्ष रखेंगे।

इस घटनाक्रम के बाद छात्रों और अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। हजारों विद्यार्थियों का भविष्य इस फैसले से जुड़ा हुआ है। अब सभी की नजरें एनसीएमईआई की आगामी सुनवाई और उसके निर्णय पर टिकी हैं, जिसने इस मामले को बेहद अहम बना दिया है।

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